**अध्याय 3: "सच का सामना"** "जब दुश्मनी ने दरवाज़ा खटखटाया"*
कबीर ने रागिनी के घर के सामने खड़े होकर सांस भरी। कोठी का पुराना दरवाज़ा उस पर गुस्से से घूर रहा था, जैसे उसके दादा की गलती की सजा उसे ही मिलने वाली हो। उसने जेब में छुपाए "शिव पत्थर" को टटोला—वो गर्म हो रहा था।
**दृश्य:**
दरवाज़ा खुला। रागिनी के पिता, मिश्रा जी, चश्मे के पीछे से जलते हुए नज़रों से देख रहे थे। *"तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहाँ आने की? तुम्हारे खानदान ने हमें बर्बाद किया!"*
कबीर ने डायरी आगे बढ़ाई। *"इसमें लिखा है... मेरे दादा ने आपके परिवार की ज़मीन चुराई। मैं इसे सही करना चाहता हूँ।"*
मिश्रा जी ने डायरी ज़ोर से पटक दी। *"सही? तुम्हारे दादा ने रिश्वत देकर मेरे पिता को आत्महत्या के लिए मजबूर किया! ये लो—"* उन्होंने एक टूटा हुआ "शिव पत्थर" निकाला। *"ये उसी दिन गंगा ने लौटा दिया था... जब तुम्हारे खानदान ने अपनी नियत खो दी।"*
**ट्विस्ट:** दोनों पत्थर एक-दूसरे की तरफ़ आकर्षित होने लगे! कबीर की डायरी से एक पुराना समझौता पत्र निकला, जिस पर **रागिनी का नाम** और उसकी शादी की शर्तें लिखी थीं—*"ज़मीन वापसी के बदले रागिनी का विवाह कबीर से।"*
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### **क्लाइमैक्स:**
बाहर बिजली कड़की। कबीर ने पत्र फाड़ने की कोशिश की, पर मिश्रा जी ने उसका हाथ पकड़ लिया। *"तुम्हें लगता है ये सिर्फ़ काग़ज़ है? ये हमारे खून का कर्ज़ है! रागिनी को पता चलेगा, तो वो तुमसे नफ़रत करेगी।"*
तभी, पीछे से आवाज़ आई—*"पापा... ये सच है?"* रागिनी दरवाज़े पर खड़ी थी, उसकी आँखों में सदमा और गुस्सा एक साथ उबल रहा था।
**अंतिम लाइन:**
*"कबीर ने महसूस किया—गंगा ने उसकी क़िस्मत की लकीरें नहीं, बल्कि दो खानदानों की नफ़रत की आग में घी डाल दिया था।"*
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**आगे क्या होगा?**
- रागिनी कबीर पर भरोसा करेगी या उसके खिलाफ़ चली जाएगी?
- टूटे "शिव पत्थर" का रहस्य क्या है? क्या वो गंगा के नीचे दबे आश्रम का पता देते हैं?
- क्या मिश्रा जी के पास कोई और राज़ है जो उन्होंने कबीर के दादा से छुपाया था?
- 🌪️ गंगा का खेल
- 💔 रागिनी का गाना
- 🕵️♂️ और राज़ खोलें!
कहानी को जल्दी से अगले मोड़ पर ले जाने के लिए comment गंगा का खेल 🔥- 💔 रागिनी का गाना




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